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महामृत्युंजय जाप उज्जैन

महामृत्युंजय मंत्र ज्योतिष और धार्मिक अर्थ में एक महत्वपूर्ण मंत्र है, जिसे महामृत्युंजय महामंत्र भी कहा जाता है। यह मंत्र भगवान शिव को समर्पित है और इसका जाप अमरत्व और भगवान की कृपा प्राप्ति के लिए किया जाता है।

महामृत्युंजय मंत्र का पूरा रूप यह है:

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥

इस मंत्र का जाप करने से लोग मृत्यु के भय से मुक्त होने की प्राप्ति करते हैं और उन्हें शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार होता है। यह मंत्र खासतर संकट और बिगड़े हालात में भी प्रायः उपयोग किया जाता है।

उज्जैन, मध्यप्रदेश, भारत में महाकालेश्वर मंदिर एक प्रमुख शैव तीर्थस्थल है, जहाँ महामृत्युंजय मंत्र का जाप भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने के लिए किया जाता है। लोग यहाँ आकर भगवान के दर्शन करते हैं और मंत्र का जाप करते हैं ताकि उनकी समस्याओं का समाधान हो सके और उन्हें आशीर्वाद प्राप्त हो सके।

महामृत्युंजय जाप के कुछ लाभ :

  1. शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य: यह जाप शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार करने में मदद कर सकता है, क्योंकि इसे मृत्यु के प्रति आदर और भयभीति का एक संवाद माना जाता है।

  2. रोगों के उपचार: यह मंत्र रोगों के उपचार में भी प्रयोग किया जा सकता है और स्वास्थ्य में सुधार करने में मदद कर सकता है।

  3. आध्यात्मिक उन्नति: महामृत्युंजय जाप से आध्यात्मिक उन्नति हो सकती है, क्योंकि यह व्यक्ति को अपने असली आत्मा की ओर प्रवृत्त कर सकता है।

  4. शांति और सुकून: यह मंत्र शांति और सुकून की भावना पैदा कर सकता है और तनाव को कम करने में मदद कर सकता है।

  5. परिवार में एकता: जब पूरे परिवार में यह जाप किया जाता है, तो यह परिवार के सदस्यों के बीच एकता और समरसता की भावना को बढ़ावा दे सकता है।

  6. मृत्यु के प्रति भय का कम होना: यह मंत्र मृत्यु के प्रति भय को कम करने में मदद कर सकता है और व्यक्ति को उसकी जीवन की मूल उद्देश्यों की ओर प्रेरित कर सकता है।

महामृत्युंजय मंत्र जाप एक प्रमुख हिन्दू मंत्र है जिसे भगवान शिव को समर्पित किया जाता है। यह मंत्र मृत्यु और रोगों से बचाव के लिए माना जाता है और इसका जाप करने से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य की सुरक्षा मिलती है।

महामृत्युंजय मंत्र का जाप साधारणत: “ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् | उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात् ||” होता है। यह मंत्र अनुष्ठानिक रूप से तीन आवृत्तियों में जाप किया जाता है, जिनके तहत यह जाप किया जाता है: प्रथमावृत्ति में १०८ बार, द्वितीयावृत्ति में १०८ बार, और तृतीयावृत्ति में ३०४ बार। इस पूजा को करते समय विशिष्ट पुराणिक मंत्रों का पाठ भी किया जाता है जिससे इसकी महत्वपूर्णता बढ़ जाती है।

उज्जैन में भी महामृत्युंजय मंत्र के जाप का महत्वपूर्ण स्थान है। यहाँ पर भगवान शिव के मंदिर में भक्तों द्वारा महामृत्युंजय मंत्र के जाप का आयोजन किया जाता है जिससे उन्हें शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है, और उनकी भक्ति और श्रद्धा मजबूत होती है।